अल्प विराम

कुछ बातें हैं
पर बातों का क्या है
बातें तो बस कुछ शब्द हैं
किसी तरह जुड़े हुए
मुझे बातों से नहीं
उनके अर्थ से मतलब है
अर्थ भी एक कहाँ
कई हैं
फिर किस अर्थ को अपनाऊँ?
इस असमंजस में ये रात गुज़र जाएगी
फिर सपनों का अर्थ समझने की कोशिश होगी
और सुबह होते ही
बातें फिर से शुरू