किनारे दूर होते होते बहुत दूर हो गए
पानी के छपाकों की आवाज़ भी डूब गयी
दिल में ऐसे सँभालते हैं ग़म जैसे जेवर संभालता है कोई
रूठ गए , नाराज़ हो गए
हाथ से अंगूठी उतारी , वापस कर दी
बाँहों के कंगन उतारे और सात फेरों समेत लौटा दिए
लेकीन वो... वो बाकी जेवर जो दिल में रख लिए
उनका क्या होगा ?